Wednesday, December 17, 2014

शमशान

हां मुझमे भरा है गुस्सा एक जिंदा शमशान धधकता है ह्रदय में ।
किसलिए?

कोई एक कारण हो तो गिनाऊ
इस सड़े हुए समाज को देख जलता हु
इस देश की दशा देख झुलसता हूँ

लोगो की बेवकूफी दोगलापन नासमझी बेइमानी झूठ फरेब नफरत क्या नहीं है जो इस आग में घी का काम नहीं करता ।
मानव शरीर जो एक प्रतिमा समान था उसे भोग्य वस्तू बना दिया है
मानवता मनुष्यता आदर्श हर एक बात को कचरे के डब्बे में डाल दिया है ।
सच्चाई इमानदारी निश्चल प्रेम जैसी बाते तो जीवन से क्या धीरे धीरे किताबों से भी गायब होती जा रही है ।

देश धर्म समाज अब हमें जोड़ने से ज्यादा तोड़ने का काम कर रहा है ।
पशुओं से भी गए गुजरे लोग धर्म और समाज के ठेकेदार बन नोचने और बेचने में लगे है।

ये सब अगर मेरे गुस्से को जायज़ ठहराने के लिए गर काफी ना हो तो आगे सुनो
पैसा अब परिवार और प्यार से ज्यादा महत्वपूर्ण हो गया है
प्यार अब पवित्र नहीं शारीरिक सुख मात्र रह गया है

सिनेमा में किसी के दुःख को देख पलकें गीली होती है पर असल जिंदगी में किसी ज़रूरतमंद की मदद तो दूर उसकी तरफ आँख उठा कर नहीं देखते
दोस्ती भी अब मतलब की ही होती है
को जितना बड़ा मौकापरस्त वो उतना ही समझदार

नारी खुद सांसारिक चमक दमक को पाने के लिए अपनी अस्मिता का सौदा करने से नहीं चूकती ।
धन दौलत झूठी शोशेबाज़ी दिखावा ही जीवन का एक मात्र उद्देश्य बन गया है

पुराने ज़माने में भी राक्षस नराधम होते थे और आज भी है बस अब उनके सींग पूँछ नहीं होते ।
कभी कभी मन करता है की आग लगा दू इस संसार को भस्म कर दूँ संहारक बन इस सृष्टि को।
सब कुछ एक बार फिर शून्य हो जाये
एक नयी शुरुआत हो
पर डर लगता है क्या होगा जब एक नयी शुरुआत के बाद
फिर से सब अच्छा ही होगा या कहीं फिर से सब इसी तरह गर्त में चला गया तो कितनी बार परशुराम बन इस धरा को कोई पापियों से कोई मुक्त कराये

समय साक्षी है परशुराम राम कृष्ण कोई भी हो उन्होंने भी यही सोचकर धरा को पापियों से मुक्त किया था की अब एक नयी शुरुआत होगी

पर आज ना परशुराम है ना कृष्ण ना राम
पर बुराई पाप और गंदगी आज भी है
और अट्टहास कर रही है सच और अच्छाई की नाकामी पर ।

ना जलाने पर ये जग निर्मल होगा ना ये मेरे मन की अग्नि धधकना बंद करेगी

-दूसरा मलंग
एक जगह बहुत से समझदार ज्ञानी लोग चर्चा कर रहे थे
इश्वर की धर्म की तो मैंने सोचा चलो थोड़ी ज्ञान की बाते सुन ले अपने भी काम आएगी ।
तो उनसब की चर्चा का विषय था धर्मान्धता और एक इश्वर
सभी बड़े बढ़ चढ़ कर कह रहे थे ये धर्म के नाम पर होने वाला पागलपन बंद होना चाहिए
लोगो को समझना चाहिए की इश्वर तो एक है
इसी तरह की बाते हो रही थी।
अब ये मलंग ठहरा मूर्ख अज्ञानी तो कर बैठा एक सवाल
मैंने कहा महानुभावों बात तो आप एकदम ठीक कह रहे हो की ईश्वर एक है और ये धर्म के नाम पर होने वाले ढकोसले और लड़ाई दंगे बंद होने चाहिए।
आप सब लोग बुरा ना माने तो एक सुझाव दू?

आप सभी ज्ञानी हो आपकी बात का वजन होता है आपकी बात सभी सुनते है तो क्यों ना आप एक इश्वर का प्रचार करे सब लोगों को पता है की ईश्वर एक है पर प्रोब्लम ये है की लोगों को चाहिए एक नाम एक कहानी इश्वर की तो आप सब मिलकर सोच ले एक इश्वर का नाम और कहानी।

बस इतना बोलना था की उन सब ज्ञानी लोगों का रूप परिवर्तन होने लगा
सबसे पहले हिन्दू वाले ज्ञानी जी के सर पर टीका चोटी प्रकट हुइ जब उन्होंने कहा इसमें कोई दो राय ही नहीं की इश्वर एक है और वो विष्णु के सिवा कोई हो ही नहीं सकता बाकि सब तो उनके अवतार है
इतना कहना था की मुस्लिम ज्ञानी जी का भेस बदल गया कहे का विष्णु इश्वर का कोई रूप नहीं इसलिए अल्लाह के सिवा कोइ और इश्वर हो ही नहीं सकता इसी केसाथ उनके सर पर टोपी और चेहरे पर बड़ी सी ढाढ़ी दिखने लगी

ये सुन कर ईसाई बुद्धिजीवी कहा चुप रहने वाले थे
कहने लगे जीसस के सिवा कोई और इश्वर हो ही नहीं सकता उनके जनम मरण और पुनर्जन्म से साबित होता है की वो इकलौते इश्वर है

इसी तरह सिख यहूदी बौद्ध जैन सब अपने अपने इश्वर को बखान करने लगे और कुछ ही देर में ये समझदारी का चोगा पहने ज्ञानी गली के कुत्तों की तरह एक दुसरे पर झपटने लगे
ये मलंग चुपचाप उठा और सबके झूठे नकाब झोले में डाले और ऊपर आसमान की तरफ देख मुस्कुराया और चल पड़ा थोड़े और नकाब अपने झोले में भरने

- दूसरा मलंग

Thursday, February 28, 2013

God's Own Country ... INDEED

एक बार एक विदेशी था ज ईश्वर पे बिलकुल भी भरोसा नहीं करता था
किसी ने उसे कहा जाओ भारत जाओ वह ऐसा देश है जहाँ जाने से तुम्हे ईश्वर पे भरोसा हो जाएगा
वहाँ इतने ज्ञानी लोग संत महात्मा है वो अपनी बातो से तुम्हे भरोसा दिला देंगे के ईश्वर होते है
तो उन साहब ने सोचा चलो ये भी आजमा लेते है का पता भारत जाने पर भगवन मिल ही जाए
तो वो आया भारत और कुछ महीनो रहा हर तीर्थ गया हर छोटे बड़े महात्मा फ़कीर मौलवी सबसे मिला
फिर अपने देश वापस गया
एअरपोर्ट पे उतारते ही उसके मित्र ने पुछा क्यूँ हुआ भगवान के अस्तित्व पे भरोसा ?

उस व्यक्ति ने अपने भारतीय मित्र को कहा हां अब पूरा भरोसा हो गया ईश्वर और उनके चमत्कार पर
अब से हर इतवार चर्च जाऊंगा
भारतीय मित्र का सीना चौड़ा हो गया ज काम विदेश में बड़े बड़े लोग नहीं कर सके वो भारत की एक यात्रा ने कर दिया . पर एक सवाल भी उठा मन में कैसे हुआ होगा ये परिवर्तन ?
उत्सुकतावश उसने पुछा तुम वहाँ किस से मिले कहाँ गए क्या देखा जिसने तुम्हे बताया की ईश्वर है ?

उस विदेशी ने कहा - मैं बहुत जगह घूमा बहुत से लोगों से मिला और देखा के एक देश जिसमे लोग अपने ही देश का बुरा चाहते है नेता देश की भलाई से ज्यादा अहमियत अपने वोट बैंक और बैंक बलेंस को देते है
जहाँ लोग हर बात पर शोर मचाते है  विरोध प्रकट करने को अपने ही उपयोग में आने वाली सार्वजानिक संपत्ति को नुक्सान पहुचाते है
कही धर्म कही नाम कहीं जाती के नाम से एक दूसरे से लड़ते है
जहाँ के नेता जन प्रतिनीधि देश के दुश्मनों को सम्मान से बुलाते है
हजारों मासूमो के खून से भी जहाँ किसी के कानो जूं तक नहीं रेंगती
खुद भ्रष्टाचार में लिप्त है फिर भी भ्रष्टाचार विरोधी भीड़ में खड़े नज़र आते है
जहा समस्याएँ रोष क्रांति बस स्टेटस मसेज से बढ़कर कुछ नहीं
जहाँ के युवा भूल गए है अपने अतीत को और भाग रहे है उनके जैसा बनने को जिनकी संस्कृति रीति नीति ही अलग है
हर कोई अपनी असली पहचान खोकर एक भद्दी हास्यास्पद नक़ल बनकर गर्व महसूस करता है

इतना सब होने के बाद भी वो देश चल रहा है इस से बड़ा चमत्कार मैंने आज तक नहीं देखा
और इतना बड़ा चमत्कार ईश्वर ही कर सकता है
इसलिए अब मैं मानता हू ईश्वर है


अब क्या ये भी लिखू के उस विदेशी के भारतीय मित्र को क्या महसूस हुआ ?

वैसे उसने कुछ कहा नहीं पर मुझे लगता है की उस भारतीय मित्र को भी कुछ महसूस नहीं हुआ होगा
जैसे हमें कुछ भी महसूस नहीं होता अपने आस पास की चोटी बड़ी गलत बातों को देखकर

इसी के साथ जय जय

-दुसरा मलंग

Saturday, February 23, 2013

Idiot Individual Speaks- What is Pure


खालिस क्या है जो शत प्रतिशत शुद्ध है बिना किसी मिलावट के
क्या वो प्रेम है क्या वो सच्चाई है क्या वो दोस्ती है क्या वो मान है
नहीं इनमे से कोई भी नहीं
क्या ऐसा प्रेम है जिसमे कोई और विचार ना आया हो कभी
क्या ऐसी सच्चाई है कोई जिसे कभी बनाया संवारा ना हो
क्या कोई मान है ऐसा जो हमेशा नि स्वार्थ भाव से दिया हो
कितना भी कोशिश कर ले ये सब कभी शत प्रतिशत शुद्ध खालिस नहीं होते
रत्ती भर ही सही पर मिलावट होती ही है इन सब में भी

तो फिर खालिस क्या है
सुनने में शायद अजीब लगे पर
नफरत इर्ष्या लालच प्रतिशोध अपमान ये सबसे शुद्ध है
प्रेम में कुछ कर गुजरने को हम एक बार हिचकिचा जाये पर नफरत प्रतिशोध के लिए एक क्षण सोचे बिना भी हम कुछ भी करने को तैयार हो जाते है
सच में मिलावट हो सकती है पर झूठ तो खालिस ही होता है
प्रेम शत प्रतिशत हो ना हो वासना हमेशा शुद्ध होती है उसमे प्रेम की मिलावट कभी नहीं होती
दोस्ती में बराबरी की या द्वेष की मिलावट हो सकती है पर दुश्मनी में नहीं

कितने आश्चर्य की बात है न की हर बुरी बात खालिस होती है और हर अच्छी बात में मिलावट
इसे ही तो कहते है इंसानी फितरत
-दुसरा मलंग

Thursday, February 21, 2013

Idiot Individual speaks


Idiot Individual again....

some time I think are we really literate or have a small amount of common sense
everyday when I log in on Facebook I saw countless Stupid ILLITERATE people
i feel bad when many friends of mine fell into that category.
How?
its very simple every day i see some pictures of God /some fake photo shopped image of cancer patient /picture of a kid who look more like a skeleton or a random pic from some horror movie
and what the say in caption
HIT LIKE and see magic
or
HIT LIKE if you really care for this poor fellow
HIT LIKE and FB donate 10 cent
HIT LIKE = 10/100/1000 salute/ respect
if you don't hit Like you don't respect
or
HIT LIKE and comment 88 and see what happen next
you Idiots don't you know nothing going to happen
no one going to donate anything
or Liking picture of some god will not make your already screwed up life better
and you are so dumb you believe if you HIT LIKE and comment any random number the Static jpg image come to life

are you so dumb who believe in all these crap?

if you don't trust check few pics like the one i mentioned above and see the number of Likes and Comments

-dusra malang

Sunday, February 17, 2013

फितरत

चलो एक दौड लगाते है 
हैं दिलों के बीच जो 
फासले उनको मिटाते है 
दोनों ने लगाईं दौड दूरियां 
मिटाने को हर दुरी 
कुनबा खुश हुआ पूरा
के होगी अब उनकी ख्वाहिश पूरी
दौड भी लगाईं दुरी भी मिटाई
गले भी लगाया यारों को
दिल के पास हुआ कुछ गर्म सा अहसास
लगा ये होगा यारों का प्यार खास
पर पल में ही हो गया लाल हर मंज़र
कमबख्त बदले नहीं यार और
फिर मार दिया खंजर

-दुसरा मलंग 

Tuesday, January 15, 2013

Idiot Individual Speak Again..

Emotional Manipulation ..          


                                                                                           


...


When we don't have courage to speak truth to our loved one we manipulate them 
but in deep inside the heart We think what if The truth comes out ?
so they manipulate more and more and make things complicated 

and personally i don't think if base of a relationship or a friendship is manipulation then it will not last long
sooner or later we are going to know trut
h and realize sometime decision taken in a hurry is not at all good decision.
another thing we are not buying a mobile or washing machine or a vehicle so we have to use or get a test drive to find is it the best
True relationships never get confused for if i settle for this person what if i got a better option later .
The most important thing for a relation no matter it is between friends or between brother and sister or with the one you love is TRUST
 




and these day reason behind most of the broken families and broken Relationship
we don't earn trust of other
We don't have courage to tell everything on first place instead we tell only things which are going to be good in our relation
this is good for short term but in long term as the other one know you were not true with them they hurt badly.

And the funny thing we never accept we hide anything
if they ask Why you hide all this from me?
We have a universal answer I am going to tell everything once everything settle down you know I am very tensed these days.

And it starts a whole new round of Manipulations and Blame games.


SOCIETY YOU'RE CRAZY BREED INDEED

Idiot Individual Speaks-

 Why we should not Get   
Married

as an Individual I think our generation is not for marriage
sound strange but i think so
reasons

we are ok with relationships but when it comes to happily married thing we behave differently 

we have high IQ but low EQ 
for us being Emotional means being Stupid

we don't understand happiness for us happiness means movies expensive gifts trip to exotic places and all the materialistic things

and the most important reasons are
We are confused we don't know what we want in life

and we only take decisions in just two conditions first in when we are too happy and second when we are angry disturbed

We make ourselves vulnerable and give others chance to hurt or use us

we pretend we are strong enough to face anything but we are the one who broke in smallest of problems

and while searching for a life partner i imagine too much and then.....

and as they say Marriages are made in Heaven then How can the Generation who belongs from Hell can be HAPPILY MARRIED

the generation who find Happiness in Ipad Ipod Iphone and I is Generation of Idiots

Sunday, March 18, 2012

भूख

बुराई अपराध गंदगी भ्रष्टाचार क्यों फैलता है , दुनिया में , देश में या फिर हमारे आस पास .
बस एक वज़ह या कारण से भूख .
चाहे वो भूख पेट कि हो पैसे कि हो शरीर कि या फिर अपना नाम पाने की हो .
हर चोटी बड़ी बुराई कहीं ना कहीं से भूक्स से जुडी होती है ..
पेट की भूख से चोरी ,पिसे कि भूख से बेईमानी रिश्वत , जिस्म कि भूख से बलात्कार वेश्यावृत्ति और इन सबसे बड़ी नाम पाने कि भूख. जो ऊपर लिखे गए हर एक अपराध कि जड़ होती है .

नाम जिसका जन्म से पहले कोई अस्तित्व नहीं और ना ही मरने के बाद .
अब आप कहोगे की हम हजारों ऐसे नाम गिना दे जो मरने के बाद भी सबके जेहन में जिंदा रहते है . तो एक बात कहूँगा और हमेशा कि तरह इस बार भी इस बात से असहमत होने वालों कि क़तर लंबी ही होगी
बात ये है कि मुर्दों के या ये कहे अमर लोगों के नाम नहीं , हम उनके काम याद रखते है .
नाम ना ही तो अछे होते है ना ही बुरे . अछे या बुरे तो काम होते है .

ना जाने फिर आजकल जिसे देखो हर कोई बस नाम के पीछे ही पड़ा है . कोई अपना नाम ना होने से नाराज़ तो कोई दूसरे का नाम होते देख जलता हुआ . कभी कभी सोचता हू पहले भी ऐसा होता तो ना हम कभी आज़ाद होते ना कभी आगे बढते
स्वत्न्र्ता के समर में ना जाने कितने अनाम हुतात्माओं ने देशप्रेम कि वेदी पर अपने प्राणों कि आहुति दी
जिनके नाम ना कोई जनता है ना भविष्य में उनके नाम जान  पाने कि कोई आशा है .
वो एक निस्वार्थ बलिदान था .
ठीक इसी तरह हम लगभग हर रोज आंतकियों या नक्सलियों के हमले में शहीद होने वाले पुलिसकर्मियों और सैनिको के बारे में पढते है , क्या वे सब अपने नाम के लिए अपनी जान न्योछावर करते है .?
तमाम उम्र बेनामी जिंदगी जीते है और मरने के बाद भी कोई नाम नहीं .
जब ये इतना बड़ा त्याग बिना नाम होने कि परवाह किये कर देते है , और एक हम है जो एक ठीकरे भर का काम करके भी चाहते है कि पूरी दुनिया में ढिंढोरा पीटा जाए हमारे काम का , कभी कभी तो किसी और के काम को भी अपना बताकर हम अपना नाम कमाने से नहीं चूकते . देखा कितनी बड़ी भूख है ये नाम की .
कुछ दिन पहले कि बात है किसी किताब में पढ़ा था कि जब हम कुछ पाने कि आशा में परोपकार या भला करते है तो वो परोपकार नहीं व्यापार बन जाता है .
मतलब ये की दो पल कि या उस से कुछ लंबी शौहरत पाने के लालच में ही ये सब अच्छे और भली का नाटक चलता है .
ऐसे लोग भी दीखते है जो सबके सामने बड़े से बड़ा डान करने से नहीं चूकते और जब किसी कि निगाह ना हो उन पर तो उनकी जेब से फूटी कौड़ी या जुबां से प्रेम के दो बोल भी नहीं निकलते .
अगर उद्देश्य भलाई है तो नाम होने या ना होने का कोई औचित्य ही नहीं . अगर मूल उद्देश्य परोपकार पूरा हो रहा है तो फिर एक झूठे नाम और क्षण भर कि प्रसिद्धि मिलने से कैसी प्रसन्नता और ना मिलने से कैसा क्षोभ

इसी के साथ विदा
जय जय
-दुसरा मलंग

Monday, February 27, 2012

नारी - एक भेंट इश्वर की सर्वश्रेष्ठ कृति को

आज ही मैं इस दुनिया में आई , अभी आँखें भी नहीं खुली थी  मैं पहचानने की कोशिस कर रही थी की मैं कौन हू ?
जवाब सोचने से पहले ही किसी की आवाज़ कानो में पड़ी की 'लड़की हुई है '
और एक ही पल में मैं अपने आप को पहचान गयी की मैं औरत हू .
जवाब मिलते ही मेरा मन विचारों की उथल पुथल से और भी विचलित हो गया .
मन में कई तरह के सवाल उठने लगे , कई तरह की शंकाए घर करने लगी
वो सभी रिश्ते दिमाग में आने लगे जो निभाने होंगे और वो रिश्ते भी जो शायद ता उम्र ढोने भी होंगे, ये भी सवाल उठा की एक औरत के रूप में  मुझे पहचान मिली है या मेरा वजूद इस पुरुष प्रधान समाज में कही खो गया है .
मस्तिषक में एक निर्बल सदा दबी कुचली हुई मोम की गुडिया सादृश्य जानवर की छवि दिखाई देने लगी जिसे नारी कहा जाता है
जिसे कभी कभी बाहर  की दुनिया में बराबर मान भी लिया जाये पर पुरुष का अहम उसे कभी अपने बराबर नहीं मान सकता
फिर चाहे वो मर्यादा पुरुषोत्तम राम हो या ऋषि गौतम या फिर आज के ज़माने के नौजवान
जड़ें खोदो तो सब के भीतर एक गर्वीला पुरुष अब भी उस नारी को बराबर का दर्ज़ा देने से कतराता है .

फिर मैंने सोचा कि मैं ये सब क्यों सोच रही हू , अगर मैं भी इसी तरह सोचने लगी तो मुझमे और उन पूर्वाग्रहों से ग्रसित दूसरी औरतों में क्या अंतर रह जाएगा जो जीवन भर यही सोचती है और सबला से अबला हो जाती है
अन्नपूर्णा से आश्रित हो जाती है और किसी न किसी हद तक उस गुटन भरे जीवन के लिए खुद जिम्मेदार होती है .
हम सबको अपना जीवन सवारने का अधिकार है हर कोई अपना भाग्य खुद लिखता है हाथों कि लकीरों का सहारा निकम्मे और नाकारा लोगो का हथियार है
मैं अपनी तकदीर खुद लिखूंगी और अपनी राह खुद बनाउंगी तब भी यही आवाज़ सुनाने को मिलेगी
कि लड़की हुई है पर तब उस आवाज़ में गर्व होगा

-दुसरा मलंग

Monday, February 20, 2012

शिव "

शिव "

शिव शंकर ना जाने कहाँ खो गए 

पर बाराती तो आज भी नज़र आ जाते है शिव के
 
हर मोड़ पर हर गली में हर छोर पर



आज के नौजवान भी देखो हलाहल पीकर नीलकंठ बने न बने

पर दम के धुंए में उड़कर खुद को शिव का सच्चा भक्त बनाना नहीं भूले


आज होते शिव तो तांडव करता देखते इस संसार को 

शायद तीसरे नेत्र से फिर भस्म ही कर डालते अपने आप को


आज की पार्वती में कहाँ है इतना प्रेम

जो दुर्गम कैलास में रहने वाले से बांधे मन


कहाँ है वो गणेश जो करे शिव पार्वती की परिक्रमा

आज का गणेश तो बस रिद्धि सिद्धि के बीच में ही है रमा


भोले शिव जैसा कौन रहा है अब भोला 

इस भोलेपन के पीछे छुपा है बस झूठ फरेब का घिनोना चोला

-दुसरा मलंग

Thursday, February 9, 2012

घनघोर अन्धकार में 
इस भयावह रात में 
अनेकोनेक विपदा के बीच 
भूमि को अपने रक्त से सींच 
तुम अकेली चली जाती हो चली जाती हो 

कभी घर में तो कभी बाहर 
कभी द्वार के भीतर तो कभी सरे बाज़ार 
माँ पत्नी सखी बहन प्रियसी हर रूप में 
हर देश में हर वेश में 
छली जाती हो छली जाती हो 

व्यक्त ना करती दर्द मन का 
घुट घुट कर सहती 
ख़ामोशी से रोती
सिसक को हंसी में छुपा 
सब कुछ झेलकर भी 
ना बताती भार अपने मन का

मित्र माना जब मुझे 
तो क्या समझा बस
सुख का साथी मुझे 
आपदा में अपनी भागी न बना
बना दिया तुच्छ मुझे 

मेरे हर मुश्किल समय में 
जब दिया तुमने साथ हर घडी 
अब जब ज़रूरत है तुम्हे साथ की 
तो अनजाना समझ मुझे 
अकेली इस बियाबान में चली 

नहीं कोई आशंका  या अंदेशा तुम पर 
है स्वयम से भी अधिक विश्वास तुमपर 
हो चाहे कैसी भी ये विकट विपदा
तुम पार पाओगी  सदा 

मैं नहीं चाहता तुमको कमज़ोर बनाना 
चाहता बस इतना हू के जब भी 
लडखडाए कदम और सामने हो तमस खड़ा 
सोचे बिना एक पल भी थम लेना हाथ मेरा 

ना डर ना रुक हो चाहे समुद्र कितना भी अथाह 
हो चाहे किता भी तेज इन लहरों का प्रवाह 
बना रहूँगा हमेशा तेरा संगी तेरा साथी तेरा सहारा 
पार पाकर हर कठिनाई से मिलेगा तुझे तेरा किनारा 
-दुसरा मलंग   

Monday, February 6, 2012

मेरी कहानी


मेरी कहानी 


एक शाम बैठा था हमेशा की तरह  तन्हा अकेला 
और याद कर रहा था वो हसीं पल
जो बिताए थे हमने कभी साथ साथ 




  थे ख्वाब या थी वो हकीकत 
जो भी था उस से खूबसूरत न कुछ जिंदगी में है 
और ना ही शायद जिंदगी के बाद होगा 
कोई जाने या न जाने कोई माने या न माने 
पर मैंने जिया है उन लम्हों को


दुनिया तो भरोसा ही नहीं करेगी 
और अच्छा ही है  के ना करे वो भरोसा मुझ पर 
इस तरह उन पलों पर बस मेरा हक होगा 

क्या हुआ जो हम मिल ना सके 
पर इस बात का गुमाँ है की मिले थे हम भी कभी 
और ऐसे मिले थे के शायद ही कोई  मिला होगा 

वो तेरे पीछे पीछे चलना 
तो कभी तेरा हाथ थाम बादलों के पार दौड लगाना 
और फिर थक कर एक दूसरे का सहारा ले बैठ जाना 
हंफ्हते हुए एक दूसरे को देख कर खिलखिलाना 



वो पहाड़ी के मंदिर पे 
अपने जूते हाथ में ले चलना 
व ठेले पे तेरा गोलगप्पे खाना 
और मुझे देख मुस्कुराना 

सर्दियों में गर्म चाय की चुस्कियों के बीच 
तिब्बत मार्केट से एक जैसी स्वेटर लेना 
और पूरी सर्दियाँ उसी स्वेटर में निकाल देना 


क्या कोई समझ पाएगा उस अहसास को 
वो रात के तीन बजे तेरा फोन करना 
और  किसी मासूम बच्चे की तरह
 फोन पर लोरी सुनाने की जिद्द करना 


और सबसे हसीं पल 
वो तेरा  पाव भाजी खाना और फिर भूल जाना 
मुझसे मासूमियत से पूछना क्या मैं कुछ खाया था  

वो दुकानों पे शादी के जोड़े देखना 
और तुझसे डाँट खाना 
 कभी सड़क किनारे पान खाना 
और पिचकारी मार मुस्कुराना 



सबसे खूबसूरत  अकेले  तन्हाई में 
एक तक एक दूसरे की आँखों में देखते रहना 
और तेरा चोरी से मेरे गालों को चूमकर
शरमाकर भाग जाना 

शायद उस खुदा को भी जलन थी मुझसे 
तभी तो बस कुछ पल दिए
तेरे साथ बिताने को 
पर फिर भी अहसान मानता हू ऐ खुदा तेरा
  उन पलो के लिए  



मैं नहीं जानता की वो दोस्ती थी या प्यार 
पर जो भी था उस से खूबसूरत कुछ भी नहीं 
इस दुनिया में 
सिवाय तेरे 

-दुसरा मलंग 




Sunday, January 29, 2012

मेरा जीवन


बीते कल के सिरहाने पर
सपने आने वाले कल के बुनता हू
पुष्पदल न मिले गर पथ पर
तो काँटों को झोली में भरता हू

भय नहीं आंधी तूफ़ान का
तेज बवंडर  से मन की अग्नि को और हवा देता हू
पाषाणों के भीड़ में रहकर हर पल अपने मन की कर
इंसान होने का सुबूत देता हू

ज़रूरत नहीं किसी नीड़ की
ना झूठी किसी भीड़ की
अकेला अपने पंख फैला
आसमान नापा करता हू

सीधे पथ को छोड़ चूका पीछे
उबड़खाबड़ राहों पर
गीत विजय के गा गाकर
पर्वत लांघा करता हू

ना चाह नाम पाने की
ना डर सरे आम बदनाम होने का 
खोया उसे छोड़ पीछे
पाए को सब में लुटा देता हू

मानव समझो या समझो दानव
गिनो सुरों में या असुरों में
है इतना सत्य का  सामर्थ्य मुझमे 
के झूठे ईश्वर को आँखे दिखा सकता हू
-दुसरा मलंग

Sunday, January 1, 2012

नव वर्ष नव हर्ष

नव वर्ष
नव हर्ष
नूतन जीवन परिभाषा

नए कुछ , कुछ पुराने सपने
कुछ मिले , कुछ बिछड़े अपने

जो बिता उसे कर रहे विदा
कुछ पल भुलाने होंगे
कुछ साथ रहेंगे सदा

कुछ अनकहे शब्द
कुछ अपने , कुछ अपनों के दिए दर्द

आज चले एक नए कल की ओर
थामे बीते कल की डोर

Monday, December 12, 2011

That special girl



That special girl...
Thinks I am

 A desperate as I always dying for hear her voice
A mad who want to be with here every time
A possessive who ask her how are you all the time
A flirt who use sugar coated words to woo her













But she never understand...
I am

Desperate only for her
mad just for her
Want to be with only her
Those words are not sugar coated they come straight from heart
She never understand she is that special girl
Who, make me cry
Who, make me smile




That special girl never understand,
She means everything for me
I can do everything for her
I can do anything to make her happy
I worry because I can’t see her sad
That special girl
Never know How much I love ….





-yogesh pareek


"I wished for nothing beyond her smile, and to walk with her thus, hand in hand, along a sun-warmed, flower-bordered path."



Saturday, November 26, 2011

26/11


26/11


बड़ी कमज़ोर है हमारी यादाश्त
हमारे इरादों की तरह
या फिर बस हमें आदत पड़ गयी है
ऐसे जीने की
जिसके बारे में सब जानते है उस बात का ढिंढोरा पीट कर  बस जिम्मेदार होने का ढोंग करते है
लोकपाल के लिए अनशन हुआ तो रंग दिए पन्ने
भर दी अपनी दीवारें
फिर उसके बाद
कुछ नहीं बस खली बैठ करने लगे इंतज़ार कुछ नए मसाले का
शरद पंवार को चांटा क्या पड़ा लग गयी अन्धो के हाथ बटेर
और हो गए फिर से शुरू
शायद याद भी नहीं होगा मेरे महँ भारत के महान जिम्मेदार नागरिको को आज की तारीख भी
क्या जो गुस्सा जो दर्द जो पीड़ा थी वो क्या बस कुछ दिनों की थी
जब तक कोई नयी खबर नहीं मिली थी
क्या इतनी मोती चमड़ी हो गयी हमारी के फर्क नहीं पड़ता हमें अब
बुरा लगे या भला मैं तो चाहता हू के जब भी कोई आंतकी हमला दुर्घटना या ऐसा कुछ हो तो हर जिम्मेदार आदमी को कोई नजदीकी मारना चाहिए
कम से कम इस तरह उन्हें वो दर्द तो ताउम्र  याद रहेगा
वो गुस्सा तो ठंडा नहीं होगा
इसी के साथ विदा
-वैसे याद दिला दू आज 26/11 है अब भी याद न आये तो जय राम जी की


-yogesh pareek